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बुन्देलखण्ड विश्वविद्यालय, झाँसी की पहली ई-बुक का विमोचन

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            दयानन्द वैदिक स्नातकोत्तर महाविद्यालय, उरई के शिक्षाशास्त्र विभागाध्यक्ष प्रो0 सत् चित् आनन्द द्वारा लिखित ई-बुक का विमोचन आज 6 सितम्बर 2012 को बुन्देलखण्ड विश्वविद्यालय, झांसी के कुलपति प्रो0 एस0वी0एस0 राणा के करकमलों से हुआ। यह बुन्देलखण्ड विश्वविद्यालय, झांसी की पहली ई-बुक है। प्रिसिंपल ऑफ एजूकेशननामक इस ई-बुक में प्रो0 सत् चित् आनन्द द्वारा बी00 प्रथम वर्ष के प्रथम प्रश्नपत्र के पाठ्यक्रम को समाहित किया गया है। विश्वविद्यालय कैम्पस में एक सादा समारोह में विमोचन करते हुए विश्वविद्यालय के कुलपति ने प्रो0 आनन्द के इस प्रयास की सराहना की और कहा कि आज के तकनीकी भरे दौर में इस तरह के कदमों की आवश्यकता है। इससे न केवल विद्यार्थियों को लाभ होगा वरन् विश्वविद्यालय तथा सम्बन्धित महाविद्यालय की गरिमा भी बढ़ती है। बुन्देलखण्ड विश्वविद्यालय के पाठ्यक्रम से सम्बन्धित इस पहली ई-बुक के आने से विश्वविद्यालय की आधिकारिक वेबसाइट का पुस्तकालय भी समृद्ध होगा। आने वाले दिनों में यदि विश्वविद्यालय और महाविद्यालय के समस्त प्राध्यापक अपने-अपने विषय से सम्बन्धित पाठ्यक्रम के आधार पर ई-बुक का निर्माण करें तो इससे विद्यार्थियों के समक्ष पाठ्यक्रम से सम्बन्धित अध्ययन सामग्री का अभाव नहीं रह जायेगा।

            बुन्देलखण्ड विश्वविद्यालय, झांसी की पहली ई-बुक के लेखक प्रो0 सत् सित् आनन्द ने बी00 प्रथम वर्ष के प्रथम प्रश्नपत्र पर आधारित अपनी इस पुस्तक के बारे में विस्तार से कुलपति और सभाकक्ष में उपस्थित समस्त लोगों को समझाया। प्रो0 आनन्द ने कुलपति महोदय को इस जानकारी से भी अवगत करवाया कि बी00 प्रथम, द्वितीय, तृतीय वर्ष के समस्त प्रश्नपत्रों के पाठ्यक्रम को ई-बुक के रूप में लाने का कार्य चल रहा है और शीघ्र ही ये समस्त ई-बुक विद्यार्थियों के अध्ययन हेतु उपलब्ध होंगी।




            बुन्देलखण्ड विश्वविद्यालय शिक्षक संघ के अध्यक्ष डॉ0 अरुण कुमार श्रीवास्तव ने प्रो0 आनन्द की जागरूकता की प्रशंसा की और कहा कि उन्होंने हमेशा छात्रहित के कार्य किये हैं और इस ई-बुक के निर्माण से भी छात्रों को लाभ पहुंचेगा। इसी के साथ डॉ0 श्रीवास्तव ने कुलपति महोदय का आभार व्यक्त करते हुए कहा कि उनके द्वारा विश्वविद्यालय की पहली ई-बुक का विमोचन किये जाने से अन्य जागरूक और सक्रिय प्राध्यापकों में भी उत्साह का संचार होगा और इसका लाभ समृद्ध पुस्तकालय के रूप में हमारे सामने आयेगा।
            0प्र0 राजनीतिविज्ञान परिषद् के प्रदेश अध्यक्ष डॉ0 आदित्य कुमार ने अपने विचार व्यक्त करते हुए कहा कि ऐसे तकनीकी भरे कार्य सदैव से प्रो0 आनन्द के करकमलों से होते रहे हैं। आज इस ई-बुक के रूप में बुन्देलखण्ड के शैक्षिक वातावरण के लिए एक मील का पत्थर रखा गया है। आने वाले दिनों में प्रो0 आनन्द के इस कार्य से प्रोत्साहन लेकर अन्य प्राध्यापक भी बुन्देलखण्ड के शैक्षिक वातावरण को उन्नत करने में अपना योगदान देंगे।
            गांधी महाविद्यालय, उरई के शिक्षाशास्त्र विभागाध्यक्ष डॉ00 पी0 शर्मा ने कहा कि आज का दिन समूचे बुन्देलखण्ड के लिए गौरव का दिन है और व्यक्तिगत रूप से हमारे लिए इसलिए भी गौरव और प्रसन्नता का विषय है कि विश्वविद्यालय की पहली ई-बुक उनके अपने विषय में आई है। कुलपति जी के सकारात्मक रवैये से आने वाले दिनों में अन्य विषयों में भी ई-बुक की रचना की जायेगी।
            ई-बुक के विमोचन समारोह में उक्त लोगों के अतिरिक्त प्रो0 सत् चित् आनन्द की धर्मपत्नी श्रीमती सुमन आनन्द, डी0वी0 कॉलेज, उरई की संगीत विभागाध्यक्ष डॉ0 वीणा श्रीवास्तव, बूटा महामंत्री डॉ0 टी0 के0 शर्मा, विश्वविद्यालय कैम्पस, समाज अध्ययन विभागाध्यक्ष डॉ0 नईम बॉबी, स्ववित्तपोषित महाविद्यालय शिक्षक संघ के अध्यक्ष डॉ0 राजीव कुमार, पी-एच0डी0 होल्डर्स एसोसिएशन के संयोजक डॉ0 कुमारेन्द्र सिंह सेंगर सहित कई अन्य प्राध्यापक तथा विश्वविद्यालय कर्मचारीगण भी उपस्थित रहे।


अब बुन्देलखण्ड के समाचार "जय बुन्देलखण्ड" पर

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बुन्देलखण्ड से सम्बंधित समाचारों का प्रकाशन आज एक जनवरी २०१२ से जय बुन्देलखण्ड नामक ब्लॉग पर होगा। कतिपय कारणों से यहाँ अब प्रकाशन करना संभव नहीं हो पा रहा है। कृपया भविष्य में जय बुन्देलखण्ड पर ही समाचारों को देखें और यहाँ के क्षेत्र के हालचाल से परिचित हों।

वातायन के संस्थापक एवं स्पंदन के प्रधान सम्पादक डॉ0 ब्रजेश कुमार का निधन

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वातायन के संस्थापक एवं स्पंदन के प्रधान सम्पादक डॉ0 ब्रजेश कुमार का निधन

शहर के दयानन्द वैदिक स्नातकोत्तर महाविद्यालय के हिन्दी विभाग के पूर्व प्राध्यापक एवं साहित्यिक पत्रिका स्पंदन के प्रधान सम्पादक डॉ0 ब्रजेश कुमार का मंगलवार को प्रातः निधन हो गया। वे 73 वर्ष के थे। डॉ0 ब्रजेश कुमार की शिक्षा-दीक्षा इलाहाबाद में हुई और अध्ययन पूर्ण करने के बाद उन्होंने उरई को अपनी कर्मस्थली के रूप में चयनित किया और महाविद्यालय को दो दशक से अधिक समय तक अपनी सेवायें प्रदान की।

उत्कृष्ट साहित्यिक प्रतिभा के धनी डॉ0 ब्रजेश का रंगमंच के प्रति भी जबरदस्त लगाव था। उन्होंने उरई जैसे छोटे से शहर में आज से लगभग 25 वर्ष पूर्व जबकि शहर में रंगमंचीय कार्यक्रमों के प्रति लोगों की विशेष रुचि नहीं थी, तब उन्होंने थैंक्यू मिस्टर ग्लॉड, लहरों के राजहंस, घासीराम कोतवाल जैसे विश्वप्रसिद्ध नाटकों का मंचन करवाया। इसके साथ ही उन्होंने नाटकों को प्रादेशिक स्तर पर भी निदेर्शित करके उरई को रंगमंच के क्षेत्र में विशेष पहचान दी। रंगमंच और सांस्कृतिक कार्यों के प्रति विशेष रुचि रखने के कारण ही उन्होंने 25 वर्ष पूर्व सांस्कृतिक एवं रंगमंचीय संस्था ‘वातायन’ की स्थापना कर शहर में सांस्कृतिक वातावरण का निर्माण किया जो आज भी निरन्तर इस ओर प्रगति कर रही है।

रंगमंच के प्रति स्नेह और साहित्य- लेखन के प्रति अनुराग रखने के कारण उन्होंने कई नाटकों तथा कविताओं की सर्जना की। ओरछा की नगरबधू, लाला हरदौल आदि जैसे स्थानीय विषयों के द्वारा उन्होंने बुन्देली संस्कृति को भी जनता के सामने रखा। साहित्य अनुराग के कारण ही वे सेवानिवृत्ति के बाद भी साहित्य से जुड़े रहे। इसी अनुराग के कारण डॉ0 ब्रजेश कुमार ने वर्ष 2005 में उरई से चौमासिक साहित्यिक पत्रिका ‘स्पंदन’ का प्रकाशन भी शुरू किया। उनके प्रधान सम्पादकत्व में निकलने वाली स्पंदन ने अपने अल्प समय में ही काफी प्रसिद्धि प्राप्त की और देश-विदेश में नाम कमाया।

अपनी सेवानिवृत्ति के बाद वे काफी समय तक उरई शहर में ही रहे और फिर अपनी आयु और शारीरिक अस्वस्थता के कारण वे अपने इकलौते पुत्र अभिनव उन्मेश कुमार के साथ रहने लगे। अन्तिम समय तक वे किसी न किसी रूप से स्वयं को सक्रिय बनाये रखे रहे। वे अपने पीछे अपनी पत्नी, पुत्री-दामाद, पुत्र-पुत्रबधू, नाती-नातिनों को छोड़ गये।

यह और बात है कि अपनी शारीरिक अस्वस्थता के कारण डॉ0 ब्रजेश कुमार अन्तिम समय में रंगमंच और साहित्य से पूर्ण रूप से नहीं जुड़े रह सके किन्तु यह सत्य है कि उनका जाना रंगमंच के क्षेत्र में, साहित्य के क्षेत्र में अपूरणीय क्षति है। इस क्षति को लम्बे समय तक भरा जा पाना सम्भव नहीं है। उन्होंने उरई जैसे छोटे नगर को रंगमंच के प्रति, साहित्य के प्रति जागरूक किया और यहां के लोगों में इनके प्रति लगाव भी पैदा किया। उनके निधन पर डॉ0 आदित्य कुमार, डॉ0 अरुण कुमार श्रीवास्तव, डॉ0 अभयकरन सक्सेना, डॉ0 वीणा श्रीवास्तव, डॉ0 एस0के0श्रीवास्तव, डॉ0 कुमारेन्द्र सिंह सेंगर, डॉ0 लखनलाल पाल, सुभाष चन्द्रा, रामजी सक्सेना, अश्विनी कुमार गुप्ता, डॉ0 राजेश पालीवाल, डॉ0 हर्षेन्द्र सिंह सेंगर, डॉ0 रवि गर्ग, डॉ0 तारेश भाटिया, डॉ0 राजेन्द्र निगम, डॉ0 डी0 के0 सिंह, डॉ0 ए0के0 निगम, डॉ0 के0 के0 निगम, डॉ0 महेश अरोरा, सुरेन्द्र सिंह कुशवाह, राजपप्पन, डॉ0 स्वातिराज आदि सहित महाविद्यालय परिवार ने तथा जिले के गणमान्य व्यक्तियों ने अपनी शोक-संवेदनाएं व्यक्त की हैं।

गोपाल कृष्ण 'पंकज' का निधन -साहित्य जगत की अपूरणीय क्षति

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जनपद जालौन के मूल निवासी एवं हिंदी गजल सशक्त हस्ताक्षर श्री गोपाल कृष्ण सक्सेना 'पंकज' का गत जनवरी को २००११ को छिदवाडा (म० प्र) में लगभग ७७ वर्ष की आयु में निधन हो गया श्री पंकज मध्य प्रदेश शिक्षा विभाग में अंग्रेजी के प्रोफ़ेसर पद से रिटायर हुए थे गत ५० वर्षों से वे साहित्य सेवा के प्रति समर्पित थे हिंदी गजल के वे ख्यातिप्राप्त साहित्यकार थे एवं उनकी रचनाएँ आकाशवाणी एवं टी वी चैनलों पर प्रसारित होती थीं । देश की सभी स्तरीय पत्र -पत्रिकाओं एवं काव्य संकलनों में उनकी रचनाएँ प्रकाशित होती रही हैं । उनके पिता श्री भगवती शरण सक्सेना D A V इंटर कालेज में अध्यापक तथा कुशल चित्रकार एवं कवि थे जिसका प्रभाव उन पर पड़ा था ।
स्व ० पंकज जी एक ग़ज़ल संग्रह 'दीवार में दरार है 'प्रकाशित है । डा सीतेश अलोक ने उने साहित्य पर टिपण्णी की है,"पंकज के कलाम की मौलिकता और विविधता उनकी शक्ति भी है और पहचान भी "बाल स्वरूप राही के शब्दों में ,"पंकज जी की गजलों में प्रेषणीयता ,सहजता और मार्मिकता प्रचुर मात्रा में विद्यमान है "

श्री पंकज के साहित्य की बानगी निम्नांकित है -

उर्दू की नर्म शाख पर रुद्राक्ष का फल है;
सुन्दर को शिव बना रही हिंदी गजल है

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पडोसी
पडोसी के घर तक पहुंचा ,
सितारों के आगे जहाँ जा रहा है

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गर्दिशे
-अध्याय में वह दौर भी जायेगा ,
जब खुदा का नाम भी विज्ञापनों में आएगा

-------------दोहे ----------

फसल
पकी झरने लगी ,आँगन में खलिहान
दाने बिके बाजार , भूखा रहे किसान

साधनाएं
फर्श पर बिखरीं पड़ी है
बांसुरी के गाँव में गोली ली है

रक्त
रंजित पुष्प, टूटे शंख,घायल प्रार्थनायें,
क्या इसी का नाम इक्कीसवीं सदी है

श्री पंकज के निधन पर जनपदका साहित्यजगत जगत अपनी भावभीनीश्रद्धांजलि व्यक्त करता है की। इस अवसर पर आयोजित श्रद्धांजलि गोष्ठी में श्री हरिभुवन श्रीवास्तव, डा राजेन्द्र पुरवार, डा वीणा श्रीवास्तव, रवीन्द्र त्रिपाठी, अश्विनी मिश्रा, डा आदित्य कुमार, डा अभय करन सक्सेना , सतचित आनंद, डा वीरेंद्र, डा कुमारेन्द्र सिंह, अशोक श्रीवास्तव, रामजी सक्सेना ,सुभाष चंद्रा , पूर्णिमा सक्सेना, इंदु सक्सेना, सुमन आनंद, मधु सक्सेना, भारती सक्सेना एवं पुष्पा श्रीवास्तव ने स्व० पंकज जी को श्रद्धा सुमन अर्पित किये


अंतर्राष्ट्रीय रिसर्च जर्नल "मेनिफेस्टो" के लिए शोध-पत्र आमंत्रित

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द्विभाषिक/Bilingual ======== UPMUL00576/24/1/2008-TC
e-mail : manifestojournal@gmail.com
webpage : http://manifestojournal.blogspot.com

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प्रधान सम्पादक
डॉ0 आदित्य कुमार
अध्यक्ष राजनीतिविज्ञान विभाग
दयानन्द वैदिक स्नातकोत्तर महाविद्यालय, उरई (जालौन) 0प्र0
CHIEF EDITOR
Dr. Aditya Kumar
Head & Reader Deptt. of Political Science
Dayanand Vedic PG College, ORAI (Jalaun) UP
Mobile - 09415169955
e-mail - dr.adityaakumar@gmail.com



सम्पादक
डॉ0 कुमारेन्द्र सिंह सेंगर
प्रवक्ता हिन्दी विभाग
गाँधी महाविद्यालय, उरई (जालौन) 0प्र0
EDITOR
Dr. Kumarendra Singh Sengar
Lecturer Deptt. of Hindi
Gandhi Mahavidyalaya, ORAI (Jalaun) UP
Mobile - 09793973686, 09415187965
e-mail - dr.kumarendra@gmail.com


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मानविकी एवं समाज विज्ञान के क्षेत्र में शोध एवं अनुसंधान सम्बन्धी गतिविधियों को प्रोत्साहित करने तथा शोधार्थियों को शोध हेतु नवीन अवसर उपलब्ध कराने की संकल्पना को अन्तर्राष्ट्रीय शोध जर्नल मेनीफेस्टो के रूप में साकार किया जा रहा है।
'मेनीफेस्टोअर्द्धवार्षिक शोधपरक अनुष्ठान है। इसमें मानविकी एवं समाजविज्ञान से सम्बन्धित विभिन्न विषयों पर शोध आलेखों का हिन्दी एवं अंग्रेजी भाषा में प्रकाशन किया जायेगा।
1) मेनीफेस्टो में प्रकाशनार्थ शोधपत्र की कम्प्यूटर द्वारा टंकित दो प्रतियाँ, सी0डी0 सहित प्रेषित करें।
2) शोधपत्र 4 आकार में कृतिदेव 10/चाँदनी फॉण्ट 14 में पेजमेकर अथवा एम0एस0वर्ड में कम्प्यूटर टाइप करवा कर नीचे दिए पते पर प्रेषित करें।
3) शोधपत्र में संदर्भ का स्पष्ट रूप से उल्लेख करें। संदर्भों को शोधपत्र के अन्त में दें तथा ध्यान दें कि संदर्भों की अनुपलब्धता की दशा में शोधपत्र स्वीकृत नहीं किया जायेगा।
4) शोधपत्रों के संदर्भों में एकरूपता रखने के लिए संदर्भों को कृपया निम्नानुसार क्रम में रखें।
(यदि संदर्भ किसी पुस्तक से है तो)
नाम का आखिरी शब्द, शेष नाम, सन्, पुस्तक-प्रकाशक का नाम, स्थान, पृष्ठ संख्या
(यदि संदर्भ किसी जर्नल से है तो)
नाम का आखिरी शब्द, शेष नाम, शीर्षक का नाम, शोधजर्नल/पत्रिका का नाम, प्रकाशक, स्थान, अंक
5) शोधपत्र की स्वीकृति/अस्वीकृति हेतु अपना पता लिखा एक पोस्टकार्ड अवश्य संलग्न करें।
6) अस्वीकृत शोधपत्रों को किसी भी स्थिति में वापस किया जाना सम्भव नहीं है। अतः अपने शोधपत्र की एक प्रति अपने पास हरहाल में सुरक्षित रखें।
7) अपने शोधपत्र के साथ मौलिकता सम्बन्धी घोषणा-पत्र अवश्य संलग्न करें कि ‘‘यह शोधपत्र पूर्णतः मौलिक है और कहीं भी प्रकाशित नहीं हुआ है। यह अन्यत्र तो प्रेषित किया गया है और ही प्रकाशनार्थ स्वीकृत हुआ है।’’
8) विषय विशेषज्ञों द्वारा अनुमोदित तथा सम्पादक मण्डल द्वारा स्वीकृति के बाद ही शोधपत्रों का प्रकाशन किया जायेगा। विशेषज्ञ मण्डल, सम्पादक मण्डल को शोधपत्र में संशोधन/विस्तार/संक्षेपण करने का पूर्ण अधिकार होगा। इसे किसी भी रूप में कहीं भी चुनौती नहीं दी जा सकती है।
9) प्रकाशनार्थ स्वीकृत शोधपत्रों के लेखकों को स्वीकृत-पत्र यथाशीघ्र प्रेषित किये जायेंगे। जिसमें प्रकाशन से सम्बन्धित विस्तृत जानकारी प्रदान की जायेगी।
10) प्रकाशित शोधपत्रों पर सर्वाधिकार मेनीफेस्टो के सम्पादक मण्डल का होगा। शोधपत्र के पुनः आंशिक अथवा पूर्ण प्रयोग हेतु सम्बन्धित आलेख के लेखक को लिखित सम्पादकीय सहमति अनिवार्य रूप से प्राप्त करनी होगी।
11) मेनीफेस्टो में शोधपत्रों के प्रकाशन के साथ-साथ पुस्तक समीक्षा का भी प्रकाशन किया जायेगा। किसी पुस्तक की समीक्षा किसी विशेषज्ञ/समीक्षक/आलोचक द्वारा प्रस्तुत की जायेगी। स्तरीय पुस्तकों की समीक्षा हेतु समीक्ष्य पुस्तक की दो प्रतियाँ पंजीकृत डाक से प्रेषित करें।
12) इसके अतिरिक्त समीक्षात्मक आलेख के साथ समीक्ष्य पुस्तक/पत्रिका की दो प्रतियाँ अनिवार्यतः प्रेषित करें।
13) मेनीफेस्टो एक अन्तर्राष्ट्रीय शोध जर्नल है। कृपया अपने शोधपत्र/समीक्ष्य कृति/समीक्षात्मक आलेख को प्रेषित करते समय इसकी उपयोगिता और मेनीफेस्टो के मानदण्डों के प्रति अनुकूलता को भली-भाँति परख लें।
14) मेनीफेस्टो का प्रकाशन अक्टूबर 2010 में किया जाना सुनिश्चित हुआ है। कृपया शोधपत्र यथासम्भव 30 अगस्त 2010 तक भेज दें जिससे मेनीफेस्टो का प्रकाशन समय से हो सके।

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पत्राचार हेतु पता


डॉ0 कुमारेन्द्र सिंह सेंगर, सम्पादक
Dr. Kumarendra Singh Sengar, EDITOR
११० रामनगर सत्कार के पास, उरई (जालौन) 0प्र0 पिन - २८५००१
110 Ramnagar, Near Satkar, ORAI (Jalaun) UP PIN- 285001

साहित्यिक पत्रिका 'स्पंदन' के बुन्देलखण्ड अंक के लिए रचनाओं का आमंत्रण

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उत्तर प्रदेश के जनपद जालौन से प्रकाशित होने वाली साहित्यिक पत्रिका स्पंदन का आगामी अंक ‘बुन्देलखण्ड विशेषांक’ के रूप में प्रकाशित किया जाना है। यह अंक मार्च 2010 के पहले सप्ताह में पाठकों को उपलब्ध हो जायेगा। यह जानकारी स्पंदन के प्रबन्ध सम्पादक डा0 लखनलाल पाल ने दी।

उन्होंने विस्तार से जानकारी देते हुए बताया कि इस अंक के लिए लगातार रचनाएँ आमंत्रित की जा रहीं हैं। रचनाकारों से अनुरोध है कि वे ऐसी रचनाएँ भेजें जिनके द्वारा बुन्देलखण्ड की संस्कृति की झलक मिलती हो। रचनाओं में लेख, कहानी, कविता, ग़ज़ल, लघुकथा, संस्मरण आदि सहित साहित्य की विविध विधाओं का स्वागत है।

डा0 लखनलाल ने स्पंदन के समय से प्रकाशन के लिए रचनाकारों से समय का विशेष ध्यान रखने का भी अनुरोध किया है। उनका कहना है कि यदि रचनाएँ 20 फरवरी 2010 तक प्राप्त हो जायेंगीं तो उनका प्रकाशन इसी अंक में किया जा सकेगा। स्पंदन के समय से प्रकाशन के लिए समय का विशेष ध्यान रखना होगा।

रचनाओं को भेजने के लिए डाक का अथवा ई-मेल का प्रयोग किया जा सकता है। डाक से रचनाओं के लिए निम्न पते पर रचनाएँ भेजें -

डा0 कुमारेन्द्र सिंह सेंगर
सम्पादक - स्पंदन
110 रामनगर, सत्कार के पास,
उरई (जालौन) उ0प्र0 पिन 285001

जो रचनाकार ई-मेल से रचनाओं को भेजना चाहते हैं वे कृपया निम्न पते पर रचनाओं को भेजें।

spandan.kss@gmail.com
spandan_kss@rediffmail.com

ई-मेल से रचनाएँ भेजने वाले रचनाकार इस बात का विशेष ध्यान दें कि रचनाएँ कृतिदेव 10 में हों तथा पेजमेकर 6.5 में अथवा एम0एस0 वर्ड फाइल के रूप हों।

डा0 लखनलाल ने एक विशेष बात पर जोर दिया कि जो रचनाकार बुन्देली भाषा में गद्य रचनाएँ प्रेषित करेंगे उनको उचित मानदेय भी प्रदान किया जायेगा। उनका कहना था ऐसी व्यवस्था बुन्देली भाषा के उन्नयन हेतु स्पंदन के सम्पादक मण्डल द्वारा निर्धारित की गई है।

रचनाकार रचना भेजते समय अपना पूरा डाक का पता स्पष्ट रूप से भेजें ताकि स्पंदन के प्रकाशन के बाद उनको प्रति भेजी जा सके।

स्पंदन को ब्लाग पर यहाँ से पढ़ा जा सकता है।

बुन्देलखण्ड टुडे - ऑन लाइन समाचार पत्र

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बुन्देलखण्डवासियों को तथा देश-विदेश में रह रहे भारतीयों को इस बात की जानकारी देनी है कि नये वर्ष सन् 2010 से उत्तर प्रदेश के जनपद जालौन के शहर उरई से आन लाइन समाचार पत्र का प्रकाशन प्रारम्भ किया जा रहा है। इस समाचार-पत्र के द्वारा बुन्देलखण्ड क्षेत्र के समाचारों का प्रकाशन किया जायेगा।

समाचारों के साथ-साथ बुन्देलखण्ड से सम्बन्धित जानकारी भी समय-समय पर प्रकाशित की जायेगी। इसका उद्देश्य देश-विदेश तक बुन्देलखण्ड क्षेत्र की जीवन्तता और सार्थकता को पहुँचाना है।

आप भी इसमें जानकारियाँ भेज कर प्रकाशित करा सकते हैं। इसके लिए आपको इसके कार्यालय से सम्पर्क करना होगा अथवा आप जानकारी सीधे bundelkhandtoday@gmail.com पर मेल कर दें।