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जनपद जालौन के मुख्य-मुख्य समाचार - 04-02-2010

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जनपद जालौन के मुख्य-मुख्य समाचार

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(1) सूचना का अधिकार पर कार्यशाला का आयोजन
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सूचना का अधिकार पर जागरूकता लाने की दृष्टि से डी0वी0सी0 उरई के राष्ट्रीय सेवा योजना के शिविर में बी0एड0 विभाग में एक कार्यशाला का आयोजन किया गया।
इस कार्यशाला को दयानन्द वैदिक स्नातकोत्तर महाविद्यालय, उरई के जन सूचना अधिकारी डा0 आदित्य कुमार ने सम्बोधित करते हुए सूचना अधिकार के महत्व और उसके उद्देश्य पर प्रकाश डालते हुए कहा कि इसका मुख्य उद्देश्य जनता के सामने सरकारी तन्त्र की कार्यप्रणाली को साफ सुथरे ढंग से रखना है। इसके द्वारा जनता अपने धन के दुरुपयोग और सदुपयोग के बारे में जान सकती है और अपने कार्यों में हो रहे अनावश्यक विलम्ब के बारे में भी जानकारी प्राप्त कर सकती है।
सूचना अधिकार का राष्ट्रीय अभियान के निदेशक डा0 कुमारेन्द्र सिंह सेंगर ने सूचना प्राप्ति के प्रत्येक कदम के बारे में बताते हुए कहा कि सबसे पहले तो हमें मालम होना चाहिए कि सूचना क्या चाहिए है और क्यों चाहिए है? सूचनाओं को मात्र प्राप्त करने के लिए ही प्राप्त नहीं करना चाहिए। इसके द्वारा आप अपनी समस्या को कैसे सुलझा सकते हैं यह जानना आवश्यक होता है।
कार्यशाला में तृतीय इकाई के छात्रों के अलावा कार्यक्रम अधिकारी योगेन्द्र बेचैन, प्राध्यापक डा0 राजेश पालीवाल भी उपस्थित रहे।

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(2) राष्ट्रीय सेवा योजना का एकदिवसीय शिविर सम्पन्न
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दयानन्द वैदिक स्नातकोत्तर महाविद्यालय उरई की राष्ट्रीय सेवा योजना की तृतीय इकाई (छात्र) का एक दिवसीय शिविर सम्पन्न हुआ। इसके प्रथम सत्र में पूर्व प्राचार्य एवं मनोविज्ञान प्रभारी डा0 अरुण कुमार श्रीवास्तव ने व्यक्तित्व विकास पर बोलते हुए छात्रों को अपने कार्यों से अपना व्यक्तित्व निखारने की सलाह दी।
रक्षा अध्ययन विभाग के अध्यक्ष डा0 अरविन्द कुमार शर्मा ने अपने कार्यों के प्रति ईमानदार और पूर्ण निष्ठा प्रदर्शित करने की सलाह छात्रों को दी।
बी0एड0 विभाग के अध्यक्ष डा0 सत्यप्रकाश श्रीवास्तव ने बच्चों को परोपकार करने और दूसरों के प्रति सकारात्मक भाव रखने को प्रोत्साहन दिया।
इसके अलावा प्राचार्य डा0 अनिल कुमार श्रीवास्तव, प्राध्यापक डा0 अरुण कुमार, कार्यक्रम अधिकारी योगेन्द्र बेचैन ने भी विचारों को व्यक्त किया।

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(3) बुन्देलखण्ड मुक्ति मोर्चा की पैदल चेतना यात्रा का आगमन
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पृथक बुन्देलखण्ड राज्य के निर्माण की माँग कर रहे बुन्देलखण्ड मुक्ति मोर्चा द्वारा एक पैदल चेतना यात्रा का आगमन उरई में हुआ। संजय शर्मा और कुरेले जी के नेतृत्व में दतिया से चलकर आई इस चेतना यात्रा का मुख्य उद्देश्य लोगों को पृथक बुन्देलखण्ड राज्य के लिए जगाना है। इस यात्रा में कई अन्य लोग भी शामिल थे।
आज इस चेतना यात्रा ने आटा, कदौरा, हमीरपुर के लिए प्रस्थान किया। विभिन्न ग्रामीण अंचलों से चलती हुई यह यात्रा ओरछा में समाप्त होगी।

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(4) कोंच में बुन्देलखण्ड मुक्ति मोर्चा की जनसभा
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दिनांक-02 फरवरी 2010 को कोंच नगर में बुन्देलखण्ड मुक्ति मोर्चा जपनद जालौन की छात्र मोर्चा ने एक जनसभा का आयोजन मण्डी परिसर में किया गया। इसमें कार्यवाहक केन्द्रीय अध्यक्ष डा0 बाबूलाल तिवारी ने कहा कि बुन्देलखण्ड राज्य का निर्माण तो होगा ही होगा। अब सवाल बस इतना है कि कब होता है? उन्होंने नारा दिया कि पैकेज नहीं, स्वराज्य चाहिए, हमें हमारा राज्य चाहिए।
इस अवसर पर केन्द्रीय प्रवक्ता डा0 डी0सी0 द्विवेदी ने कहा कि हमें अभी तक कमजोर समझकर बरगलाया जाता रहा है। अब यहाँ की जनता जाग चुकी है और उसने अपने लहू में वही ज्वार लाना शुरू कर दिया है जो कभी आल्हा-ऊदल, छत्रसाल, अभई आदि वीरों में देखने को मिलता था।
अन्य लोगों में बुन्देलखण्ड मुक्ति मोर्चा के जिलाध्यक्ष आशीष मिश्रा, छात्र मोर्चा के आदित्य व्यास, पराग शर्मा, kumarendra sinh sengar, subhash chandra सहित कोंच नगर के सैकड़ों लोग उपस्थित रहे।

वैज्ञानिक एवं तकनीकी शब्दावली आयोग की कार्यशाला संपन्न - दूसरा दिन

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दयानन्द वैदिक स्नातकोत्तर महाविद्यालय, उरई द्वारा ‘मानविकी और समाजविज्ञान में तकनीकी शब्दावली की उपयोगिता’ विषय पर आयोजित दो दिवसीय कार्यशाला के दूसरे दिन दिनांक 20 जनवरी 2010 को प्रारम्भ हुए तुतीय तकनीकी सत्र में वैज्ञानिक अधिकारी डा0 अवनीश सिंह ने आयोग और उसके विविध क्रियाकलापों पर प्रकाश डाला। उन्होंने कहा कि शब्द निर्माण एक प्रक्रिया है, यह प्रक्रिया एकाएक नहीं होती है। इसके लिए विविध विषय-विशेषज्ञों का आपसी विचार-विमर्श होता है और इसके बाद ही किसी नये शब्द का निर्माण किया जाता है। आयोग इस समय एक परिभाषकोश का निर्माण कर रहा है।
(वैज्ञानिक अधिकारी डा0 अवनीश सिंह)
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ऋषिकेश से विषय-विशेषज्ञ के रूप में कार्यशाला में उपस्थित हुई डा0 पूजा त्यागी ने कहा कि शब्दों की सजगता और चेतना के साथ निर्माण करने की आवश्यकता होती है। शब्दों की गति को समझना बहुत ही आवश्यक होता है। बिना गति को समझे यदि शब्दों का निर्माण किया जाता है तो ऐसी शब्दावली क्लिष्टता पैदा करती है। इस मुश्किल से बचने के लिए आयोग को सरल शब्दों का निर्माण करना चाहिए।
(विषय-विशेषज्ञ पूजा त्यागी)
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इस तकनीकी सत्र की अध्यक्षता कर रहे डा0 राजेन्द्र कुमार पुरवार ने कहा कि शब्दों के नये-नये रूप आने से नये शब्द तो चलन में आ जाते हैं किन्तु बहुत से शब्दों का लोप हो जाता है। आयोग अपना कार्य करता है, इसके साथ ही जनमानस का यह कार्य भी होना चाहिए कि शब्द और संस्कृति को बनाये रखा जाये। इसके अभाव में आज बहुत सी भाषाएँ और संस्कृतियाँ विलुप्त हो चुकी हैं।
(डा0 राजेन्द्र कुमार पुरवार)
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कार्यशाला के चतुर्थ सत्र में कानपुर क्राइस्टचर्च डिग्री कालेज के राजनीति विज्ञान विभाग के अध्यक्ष, डा0 ए0के0 वर्मा ने तकनीकी शब्दों की उपयोगिता के बारे में बताते हुए कहा कि अनुवाद के समय इन शब्दों की बहुत ही आवश्यकता होती है। इसके साथ साथ शब्दों के द्वारा भाव सम्प्रेषण का कार्य भी होता है। शब्द विचार को सरल और बोधगम्य बनाते हैं, इस दृष्टि से आयोग को सरल शब्दों के निर्माण पर भी जोर देना चाहिए। आयोग बहुत अच्छा कार्य कर रहा है किन्तु इसको अभी आम आदमी से जोड़ पाने में वह विफल रहा है।
(कानपुर क्राइस्टचर्च डिग्री कालेज के डा0 ए0के0 वर्मा)
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इसके अलावा इस तकनीकी सत्र में भीमराव अम्बेडकर विश्वविद्यालय, लखनऊ के राजनीति विज्ञान विभाग के डा0 रिपुसूदन सिंह, दयानन्द वैदिक महाविद्यालय, उरई मनोविज्ञान विभाग के डा0 तारेश भाटिया, लक्ष्मीचरण हुब्बलाल महाविद्यालय, करसान के बी0एड0 विभाग के सलिल तिवारी तथा अध्यक्षता कर रहीं इतिहास विभाग की अध्यक्ष डा0 शारदा अग्रवाल ने भी विचार व्यक्त किये।

समापन सत्र में स्थानीय संयोजक डा0 वीरेन्द्र सिंह यादव ने कार्यशाला की विस्तृत रिपोर्ट सभी के समक्ष रखी। इसके द्वारा उन्होंने आयोग के सामने सुझाव रखे कि कार्यशालाओं का अधिक से अधिक आयोजन किया जाये। इंटरनेट पर भी शब्दावली को डाला जाये जिससे आम आदमी भी आसानी से आयोग की शब्दावली से जुड़ सके। इसके साथ-साथ आयोग द्वारा एक शोध-पत्रिका निकालने का भी सुझाव दिया गया।

आयोग की ओर से आये वैज्ञानिक अधिकारी डा0 ब्रजेश सिंह ने कहा कि यहाँ का माहौल बहुत ही अच्छा लगा और जल्द ही किसी अन्य विषय को लेकर कार्यशाला का आयोजन किया जायेगा। अपने प्रकाशनों के बारे में बताते हुए कहा कि आयोग की ओर से शीघ्र ही अपनी बेव साइट बनाने की दिशा में कार्य चल रहा है। प्रकाशनों को आयोग के द्वारा ही प्राप्त किया जा सकता है।
(वैज्ञानिक अधिकारी डा0 ब्रजेश सिंह)
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समापन-सत्र में मुख्य अतिथि डा0 देवेन्द्र कुमार, विशिष्ट अतिथि डा0 ब्रजेश सिंह, डा0 शिवकुमार चैधरी, अध्यक्ष डा0 हरीमोहन पुरवार, प्राचार्य डा0 अनिल कुमार श्रीवास्तव भी मंचासीन रहे तथा अपने विचार प्रकट किये।

कार्यक्रमों में तुतीय तकनीकी सत्र का संचालन डा0 आर0 के0 गुप्ता ने, चतुर्थ सत्र का संचालन डा0 अनुज भदौरिया ने तथा समापन सत्र का संचालन डा0 अलका रानी पुरवार ने किया।








वैज्ञानिक एवं तकनीकी शब्दावली आयोग की कार्यशाला - प्रथम दिवस

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‘‘हिन्दी और अन्य भाषाओं में तकनीकी शब्दावली का विकास करने के लिए सन् 1961 में वैज्ञानिक एवं तकनीकी शब्दावली आयोग की स्थापना की गई। इस आयोग का मुख्य कार्य हिन्दी के लिए पारिभाषिक तथा तकनीकी शब्दों का निर्माण करना है। विषय-विशेषज्ञों द्वारा आपसी विचार-विनिमय के बाद अंग्रेजी शब्दों का अनुवाद कर हिन्दी शब्दों का निर्माण किया जाता है।’’ उक्त विचार वैज्ञानिक एवं तकनीकी शब्दावली आयोग, नई दिल्ली के वैज्ञानिक अधिकारी डा0 शिवकुमार चौधरी द्वारा व्यक्त किये गये। डा0 शिवकुमार चौधरी यहाँ दयानन्द वैदिक स्नातकोत्तर महाविद्यालय, उरई द्वारा आयोजित दो दिवसीय कार्यशाला के प्रथम दिन दिनांक 19 जनवरी 2010 में मुख्य वक्ता के रूप में उपस्थित थे। ‘मानविकी और समाजविज्ञान में तकनीकी शब्दावली की उपयोगिता’ विषय पर आयोजित कार्यशाला में डा0 चौधरी ने कहा कि कंठलंगोट, लौहपथगामिनी, ध्रूमदण्डिका जैसे शब्द आयोग द्वारा नहीं बनाये गये हैं। ऐसे शब्दों को लोग आपस में हास-परिहास द्वारा प्रयोग करते हैं। आयोग शब्द को सर्वमान्य रूप में स्वीकार करने की ओर बल देता है।
(शिवकुमार चौधरी, मुख्य वक्ता)
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स्थानीय संयोजक डा0 वीरेन्द्र सिंह यादव ने विषय की प्रासंगिकता पर प्रकाश डालते हुए कहा कि अनुवाद के कार्य में तथ्यों और संवेदना का ध्यान रखा जाना चाहिए। अनुवाद मात्र इस कारण से न हो कि किसी अंग्रेजी शब्द को हिन्दी में बनाना है। बहुत से अंग्रेजी एवं अन्य भाषाओं के शब्द हम रोजमर्रा के कार्यों में प्रयोग करते हैं और वे अब अन्तरराष्ट्रीय रूप में भी मान्य हैं, उन्हें उसी रूप में प्रयोग करना चाहिए जैसे-रेडियो, प्लेटफार्म, बस, टिकट, पेंशन आदि।
(वीरेन्द्र सिंह यादव, स्थानीय संयोजक)
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मुख्य अतिथि डा0 देवेन्द्र कुमार ने कहा कि शब्दों को जीवन में आवश्यक माना जाता है क्योंकि एक व्यक्ति जन्म से अन्तिम समय तक शब्दों के द्वारा ही अभिव्यक्ति करता रहता है। इस कारण शब्दों का सही और मान्य स्वरूप ही प्रयोग करना चाहिए।
(देवेन्द्र कुमार, मुख्य अतिथि)
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इस अवसर पर डा0 वीरेन्द्र सिंह यादव द्वारा सम्पादित पुस्तक ‘इक्कीसवीं सदी का भारत: मुद्दे, विकल्प और नीतियाँ’ का भी विमोचन किया गया।
(पुस्तक विमोचन)
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पुस्तक पर प्रकाश डालते हुए डा0 कुमारेन्द्र सिंह सेंगर ने बताया कि इस पुस्तक में 69 लेख विभिन्न विषयों से सम्बन्धित हैं। इसमें अर्थव्यवस्था, पंचायती राज, जनसंख्या वृद्धि, समलैंगिकता, कन्या भ्रूण हत्या, आपदा नियंत्रण, बाल विकास आदि विशेष हैं। इन लेखों के द्वारा आम आदमी के जीवन से लेकर भूमण्डलीकरण, आधुनिकता, जनसंचार, पत्रकारिता आदि की व्यापक चर्चा की गई है।
(पुस्तक पर चर्चा करते कुमारेन्द्र)
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डी0वी0 कालेज, उरई के प्राचार्य डा0 अनिल कुमार श्रीवास्तव ने गोष्ठी की उपयोगिता पर प्रकाश डालते हुए कहा कि शब्दों के मानक रूप के प्रयोग करने से सभी को सुविधा होती है। इससे आपसी चर्चा में भी दिक्कत की स्थिति नहीं आती है।
(अनिल कुमार श्रीवास्तव, प्राचार्य)
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कार्यशाला की अध्यक्षता कर रहे डा0 हरीमोहन पुरवार ने कहा कि कुछ शब्द समय के साथ लुप्त हो जाते हैं। यह बात इसको सिद्ध करती है कि शब्दों का भी एक व्यक्ति की तरह से जीवन होता है। वह भी समय के साथ जीवित रहता है और मृत्यु को प्राप्त होता है। उदाहरण के लिए मोटरसाइकिल के लिए कभी उपयोग होने वाला फटफटिया शब्द आज बिलकुल नहीं सुनाई देता है। इसी तरह पलंग के लिए इस्तेमाल होने वाला खटिया अब कम से कम सुनाई देता है। शब्दों को जीवित रखने के लिए आवश्यक है कि उनका लगातार प्रयोग किया जाता रहे।
(हरिमोहन पुरवार, अध्यक्ष)
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तकनीकी सत्र में डा0 एस0 पी0 सक्सेना, पूर्व उप-निदेशक, वैज्ञानिक एवं तकनीकी शब्दावली आयोग, ने शब्दों के प्रयोग, उनके अर्थ पर व्यापक चर्चा की। उन्होंने वर्कशाप शब्द को स्पष्ट करते हुए कहा कि इस शब्द को कार्यशाला, कर्मशाला के नाम से भी जाना जाता है। यहाँ यह ध्यान रखना होगा कि जब बौद्धिक चर्चा होती है वहाँ कार्यशाला शब्द का प्रयोग होगा और जहाँ आटोमोबाइल की बात होगी वहाँ कर्मशाला का उपयोग होगा। इसी तरह उन्होंने अन्तर्राष्ट्रीय और अन्तरराष्ट्रीय शब्द के बारे में बताते हुए कहा कि जब एक देश के भीतर की ही बात हो तो वहाँ अन्तर्राष्ट्रीय शब्द का प्रयोग होगा और जब दो देशों के आपसी सम्बन्धों की बात की जाये तो वहाँ अन्तरराष्ट्रीय शब्द लिखा जायेगा।
(एस पी सक्सेना, पूर्व उप निदेशक)
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इस सत्र के विषय-विशेषज्ञ, डी0वी0 कालेज के डा0 आदित्य कुमार ने कहा कि आयोग हिन्दी के प्रामाणिक शब्द तो बना रहा है किन्तु वे अभी जनसामान्य में ज्यादा प्रचलित नहीं हैं। इसके लिए आयोग का यह कार्य होना चाहिए कि वह शब्दों को जन सामान्य तक भी पहुँचाने का प्रयास करे। बच्चों को भी बचपन से पाठ्यक्रम के द्वारा मान्य शब्दों से परिचय करवाया जाना चाहिए, बच्चों के लिए बनाई जा रही वैज्ञानिक फिल्मों में भी तकनीकी शब्दावली का प्रयोग किया जाना चाहिए।
(आदित्य कुमार, विषय-विशेषज्ञ)
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तकनीकी सत्र की अध्यक्षता कर रहीं डा0 जयश्री पुरवार ने कहा कि आयोग शब्दों के स्वरूप निर्धारण को लेकर बहुत ही अच्छा काम कर रहा है किन्तु इसके बाद भी ये शब्द जन जन तक नहीं पहुँच पा रहे हैं। कुछ शब्द तो इतने कठिन होते हैं कि उनको समझने में भ्रम की स्थिति पैदा होती है। इस बारे में भी आयोग को ध्यान देना चाहिए।

कार्यशाला में ऋषिकेश से डा0 पूजा त्यागी, बरेली से डा0 दयाराम, झाँसी से डा0 किशन यादव, कानपुर से डा0 मनोरमा, दिल्ली से डा0 जयसिंह, डा0 ब्रजेश सिंह, ललितपुर से डा0 पुनीत बिसारिया, लखनऊ से डा0 रिपुसूदन सिंह के अतिरिक्त स्थानीय प्रतिभागी और विद्वतजन् भी उपस्थित रहे।

कार्यशाला के उदघाटन सत्र का संचालन डा0 अलकारानी पुरवार ने तथा तकनीकी सत्र का संचालन डा0 आनन्द खरे ने किया।
(अलका रानी पुरवार, संचालक)
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