समाचार शीर्षक
मानवाधिकार - कितने प्रासंगिक?
हर्ष एवं उल्लास का पर्व 'लोहड़ी'
हिंदी साहित्य जगत की अनुपम निधि- स्व. गोपाल दास 'नीरज'
डा. बिधान चंद्र राय -एक विलक्षण व्यक्तित्व
सियासत की खास बात
भारत के राजनीतिक पटल पर जहॉ एक ओर पूर्वोत्तर में हुये चुनावों में भगवा लहर दिखाई दी वहॉ उत्तर भारत में हुये उपचुनावों में सत्तारूढ़ भाजपा को गहरा झटका लगा. इस राजनीतिक उठा-पटक को देख कर लेखनी से कविता के रूप में मेरी जो प्रतिक्रिया प्रस्फुटित हुई जो कि निम्नवत् है-
"कोई हँस रहा है, तो कोई उदास है,
सियासत की, यही तो खास बात है.
हमारी व्यवस्था को, क्या हो गया है,
चुनावी गणित में ,' जन ' खो गया है.
ये वोटों का चक्कर, प्रमुख हो गया है,
और जनता से नेता, विमुख हो गया है .
सत्ता को जलवा, दिखाने की लत है,
विरोधी को चिल्लाने , की आदत है.
त्रिपुरा में वामी किला ,ढह गया था,
विरोधी दलों का, दिल हिल गया था.
नागालैण्ड,मेघालय ,मणिपुर कब्जे में,
दिखाई थीै ताकत , हिंदुत्व ज़ज्बे ने.
भुनाया था ' हिंदुत्व' में ,'योगी' का चेहरा,
बँधा था पूर्वोत्तर में, विजय का सेहरा.
रिजल्ट उपचुनावों में,आया है उल्टा,
गणित सारा यू. पी. ,बिहार में पल्टा.
इलाके में योगी के, भगवा है हारा,
मिला 'फूलपुर' मे , न जनता का सहारा.
बिहार में लालू ने ताकत दिखाई,
कि सत्ता का चेहरा, हुआ है हवाई.
बहिन जी भी खुश हैं, भइया भी खुश हैं,
जमानत गँवा कर , गाँधी भी खुश हैं.
जनाधार खो कर , वामी भी खुश हैं,
ये बसपा, सपा के ,सिपाही भी खुश हैं.
सत्ता की भँवों पर , खिचीं हैं लकीरें,
उन्नीस में मुद्दे , अब क्या- क्या उकेंरें.
अहं को पड़ा है, अब तगड़ा तमाचा,
जनतंत्र में जनता की होती यही भाषा."
धार्मिक स्थलों पर लाउडस्पीकर पर प्रतिबंध
उ.प्र.में योगी सरकार के धार्मिक स्थलों पर लाउडस्पीकर पर प्रतिबंध के आदेश को लेकर राजनीति गर्मा गयी है.
इस संबंध में धवनि प्रदूषण रोकने का हाईकोर्ट का पहले से ही निर्देश है . पिछली सपा सरकार ने भी कुछ ऐसा ही आदेश जारी किया था.
प्रश्न यह उठता है कि सरकारें कितनी ईमानदारी से ध्वनि प्रदूषण रोकना चाहती हैं.
हमारे देश में ध्वनि प्रदूषण फैलाने में धार्मिक स्थल व धार्मिक कार्यक्रम एक बड़ी सीमा तक उत्तरदायी हैं. धार्मिक आयोजन जहॉ मन की शांति के लिये किये जाने चाहिये,वहॉ इनमें लाउडस्पीकर का प्रयोग आस पास के लोगों की नींद हराम करने का कारण बन जाता है. लोग कह नहीं पाते , पर मन ही मन आयोजक को गालियॉ व बददुआयें देते हैं.
सारी रात चलने वाले आयोजन बुजुर्गों, बीमारों व पढ़ने वाले बच्चों के लिये सिर दर्द साबित होते हैं. दुर्गा पूजा, गणपति पूजा,यज्य तथा उर्स ,मुहर्रम आदि पर की जाने वाली तकरीरें आदि अवसरों पर तो हद ही हो जाती है.
अत: प्रथम दृष्टया यह निर्णय स्वागत योग्य है यदि इसे निष्प छ रूप से लागू किया जाये.
पर आदेश यह है कि बिना इजाजत लाउडस्पीकर का प्रयोग नहीं किया जा सकता.इसी में गड़बड़ी होती है. इजाजत देने के स्पष्ट मानक तय होने चाहिये. जो अधिकारी गलत मानकों का उल्लंघन कर किसी के रुतबे या प्रभाव में आकर इजाजत दे ,उस पर कठोर कार्यवाही होनी चाहिये.
आने वाला समय अगले लोकसभा चुनाव की तैयारी का समय है.सरकारें किस तरह काम करतीं हैं ,यह देखना उत्सुकतापूर्ण होग
बस्ती बड़ी अजीब यहाँ की
जैसी आशा की जा रही थी, आज श्री लालू यादव को देवधर राजकोषागार मामले में सी सजा का ऐलान हो गया. कोर्ट ने साड़े तीन साल की सजा व पॉच लाख जुर्माने की सजा सुना दी.
राजद को भी ऐसा पूर्वानुमान था ही,अत: ऐसा माहौल बनाया गया कि जैसे लालू जी शहीद होने जा रहे हैं और सिस्टम के द्वारा उन्हें पिछड़े वर्ग का होने की सजा दी जा रही है. लालू ने भी समर्थकों से गरीबों के लिये हमेशा संघर्ष करते रहने की भावुक अपील की.
हमारे देश में राजनीति कहॉ जा रही है? दोषी शर्मिंदा होने की जगह सीनाजोरी दिखा रहे हैं.यानी वे फिर आये तो पुन: इसी रास्ते पर चलेंगें. हमारे यहॉ समर्थक तो व्यक्ति पूजा में अंधे होते हैं,चाहे वे किसी दल के हों.
आज के दृश्यों को देख कर मुझे सुकवि विनोद निगम की कविता की पंक्तियाँ याद आ गयीं-
" बस्ती बड़ी अजीब यहॉ की,
न्यारी है तहज़ीब यहाँ की,
जिनके सारे काम गलत हैं,
सुबह गलत है ,शाम गलत है,
उनको लोग नमन करते हैं."
महानता की ओर अग्रसर हमारा देश
कल पाक फ़ायरिंग में शामली ,उ.प्र. के निवासी हाजरा शहीद....
फिर एक सैनिक का बलिदान......
सरकार सोचती है कि सैनिक मरने के लिये होतेे हैं.....
विरोधी दलों को सरकार को कोसने का एक और मौका......
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आम आदमी किंकर्तव्यविमूढ़......
संवेदनशीलता....
औपचारिक और कुछ समय बाद जीरो विजिबिलिटी
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देश महान बनने की दिशा और विकास ओर अग्रसर
बुन्देलखण्ड विश्वविद्यालय, झाँसी की पहली ई-बुक का विमोचन
अब बुन्देलखण्ड के समाचार "जय बुन्देलखण्ड" पर
रेडक्रॉस सोसायटी जालौन का निर्वाचन संपन्न
आज दिनांक 2 दिसम्बर 2011 को जनपद जालौन की भारतीय रेडक्रास सोसायटी का त्रिवर्षीय निर्वाचन विकास भवन मीटिंग हॉल में सम्पन्न हुआ। अपर जिलाधिकारी की अध्यक्षता में सम्पन्न इस निर्वाचन में सर्वसम्मति से उरई शहर के युवा समाजसेवी अभय द्विवेदी को सोसायटी का सचिव चुना गया। इसके साथ ही कोषाध्यक्ष के लिए शिक्षक युद्धवीर कंथरिया को चुना गया। भारतीय रेडक्रास सोसायटी की प्रबन्धकारिणी कमेटी में पदेन सदस्यों-जिलाधिकारी, मुख्य चिकित्साधिकारी, उप-मुख्य चिकित्साधिकारी, जिला विद्यालय निरीक्षक आदि-के अतिरिक्त सचिव, कोषाध्यक्ष तथा पांच सदस्य शामिल होते हैं।
उपस्थित सदस्य
सदस्यों में से सचिव और कोषाध्यक्ष के निर्वाचन के बाद पांच सदस्यों का निर्वाचन भी सर्वसम्मति से किया गया। इसमें रामशरण जाटव, रेहान सिद्दीकी, डॉ0 अलका नायक, डॉ0 कुमारेन्द्र सिंह सेंगर तथा ज्ञानेन्द्र सिंह राजावत को चुना गया। प्रदेश प्रतिनिधि के रूप में अशोक द्विवेदी के नाम पर सभी सदस्यों में सहमति बनी। जनपद की सोसायटी की प्रबन्धकारिणी में पांच सदस्यों का मनोनयन जिलाधिकारी की ओर से किया जाता है। इन पांच नामों की घोषणा बाद में की जायेगी।
सेंटर फॉर द रिसर्च स्टडी ऑफ सोसायटी की नियमित मासिक बैठक का आयोजन
मासिक बैठक == सेंटर फॉर द रिसर्च स्टडी ऑफ सोसायटी (CRSS)
स्थान == उरई (जालौन) दिनांक == 16-10-2011
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दिनांक 16 अक्टूबर 2011 को सेंटर फॉर द रिसर्च स्टडी ऑफ सोसायटी की नियमित मासिक बैठक का आयोजन सुशील नगर स्थित आदर्श एकेडमी में हुआ। ‘अन्ना का आन्दोलन: दिशा एवं दशा’ विषय पर आयोजित विचार-गोष्ठी की अध्यक्षता कर रहे डॉ0 आदित्य कुमार ने अन्ना के आन्दोलन के दोनों चरणों पर विस्तार से प्रकाश डालते हुए वर्तमान में अन्ना टीम की कार्यप्रणाली का विस्तार से समझाया। उनका कहना था कि अन्ना टीम के अन्य सदस्य कहीं न कहीं अतिवादिता के शिकार हो रहे हैं, उन्हें इससे बचने की आवश्यकता है। जिस प्रकार से अन्ना टीम के अन्य दूसरे सदस्यों में और अन्ना के बयानों में अब मतभेद की स्थिति बनती दिख रही है वह आन्दोलन की दिशा को भ्रमित करेगी। अन्ना का एक टी0वी0 चैनल को दिये साक्षात्कार में यह कहना कि यदि कांग्रेस जनलोकपाल बिल को पारित करवा देती है तो वे कांग्रेस के पक्ष में प्रचार करेंगे, कहीं न कहीं भ्रष्टाचार के विरुद्ध शुरू किये गये एक अच्छे आन्दोलन को कमजोर करेगा।
राजनीतिक एवं चुनाव विश्लेषक डॉ0 कुमारेन्द्र सिंह सेंगर ने हिसार के चुनावों को संदर्भित करके अन्ना आन्दोलन की वर्तमान स्थिति का विश्लेषण किया। उनका मानना था कि हिसार में कांग्रेस की हार तो पहले से ही तय थी, ऐसे में अन्ना टीम द्वारा वहां पर किसी एक दल के विरोध में राजनीतिक लामबंदी सी करना कहीं न कहीं उनके आन्दोलन पर संदेह सा पैदा करता है। अन्ना टीम को अब इस बारे में विचार करना चाहिए कि अपने 12 दिनों के आन्दोलन के समाप्त होने के बाद से उनकी टीम ने ऐसा कौन सा कार्य किया है जिसके आधार पर पूरे आन्दोलन में जुड़े रहे युवाओं को उसी तीव्रता से जोड़े रखा जाये।
सोसायटी के सचिव राघवेन्द्र द्विवेदी का कहना था कि अन्ना टीम ने खुद को नीयति का निर्धारक मान लिया है जबकि ऐसा नहीं है, नीयति ही नेता का निर्धारण करता है। जिस तरह से अन्ना और उनकी टीम के बयान आ रहे हैं उससे लगने लगा है कि वे लोग कहीं न कहीं कांग्रेस विरोध में कार्य कर रहे हैं न कि जनलोकपाल बिल को लाने के सम्बन्ध में। केजरीवाल, किरन बेदी आदि ऐसे नाम हैं जो अपने कार्यकाल के दौरान कहीं न कहीं सरकार से, कांग्रेस से परेशान रहे हैं और उसी का आक्रोश वे इस रूप में निकाल रहे हैं।
संजीव कुमार का कहना था कि अन्ना आन्दोलन जिस तेजी से हम सभी के बीच अपनी जगह बनाता दख रहा था उसी तेजी से लग रहा है कि वो अपनी विश्वसनीयता खोने वाला है। बाबा रामदेव की तरह से ही सरकार अन्ना के आन्दोलन को भी कुचलने का रास्ता निकालने की जुगाड़ बना रही है, ऐसे में टीम अन्ना को प्रत्येक कदम फूंक फूंक कर रखने की आवश्यकता है। गोष्ठी के आयोजक जगत सिंह ने कहा कि अन्ना टीम का काम सराहनीय रहा है और चूंकि इस देश को भ्रष्टाचार से लड़ने वाला कोई अगुवा चाहिए था जो अन्ना के रूप में प्राप्त हुआ। इस कारण से सभी लोग बिना किसी भेदभाव के अन्ना के साथ जुड़ गये।
कौशल किशोर ने अन्ना टीम के प्रति विश्वास व्यक्त करते हुए कहा कि वे सारे सदस्य मिलजुल कर काम करेंगे तो ऐसा नहीं है कि सरकार से घबरा जायें। सरकार की मंशा तो हमेशा से ही उनके आन्दोलन को दबाने की रही है और जनता के सहयोग से ऐसा कर पाना सरकार के लिए सम्भव नहीं हो सकेगा। बी0एड0 के छात्र राघवेन्द्र का कहना था कि अन्ना टीम को इस समय भ्रष्टाचार के अलावा किसी और विषय पर बात करके मुद्दे से भटकने का कार्य नहीं करना चाहिए। यदि उनकी टीम के सदस्यों के बयानों में अथवा स्वयं सदस्यों में भटकाव आयेगा तो यह तय है कि इस आन्दोलन को सरकार दबाने से नहीं चूकेगी। इस अवसर पर सभी आये हुए सदस्यों के प्रति आभार सोसायटी के वरिष्ठ सदस्य शिवशंकर ने व्यक्त किया।
सोसायटी की बैठक की अगली तिथि 20 नवम्बर रविवार को निश्चित की गई है, जिसमें एक सर्वेक्षण से सम्बन्धित विषय पर, प्रश्नावली आदि पर चर्चा की जायेगी।

