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सियासत की खास बात

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  भारत के राजनीतिक पटल पर जहॉ एक ओर पूर्वोत्तर में हुये चुनावों में भगवा लहर दिखाई दी वहॉ उत्तर भारत में हुये उपचुनावों में सत्तारूढ़ भाजपा को गहरा झटका लगा. इस राजनीतिक उठा-पटक को देख कर लेखनी से कविता के रूप में मेरी जो प्रतिक्रिया प्रस्फुटित हुई जो कि निम्नवत् है-

"कोई हँस रहा है, तो कोई उदास है,
सियासत की, यही तो खास बात है.
          हमारी व्यवस्था को, क्या हो गया है,
          चुनावी गणित में ,' जन ' खो गया है.
ये वोटों का चक्कर, प्रमुख  हो गया है,
और जनता से नेता, विमुख हो गया है .
          सत्ता को जलवा, दिखाने की लत है,
          विरोधी को चिल्लाने  , की आदत है.
त्रिपुरा में वामी किला ,ढह गया  था,
विरोधी दलों का, दिल हिल गया था.
          नागालैण्ड,मेघालय ,मणिपुर कब्जे में,
          दिखाई थीै ताकत ,   हिंदुत्व ज़ज्बे ने.
भुनाया था ' हिंदुत्व' में ,'योगी' का चेहरा,
बँधा  था पूर्वोत्तर में, विजय  का  सेहरा.
           रिजल्ट उपचुनावों में,आया  है उल्टा,
           गणित सारा यू.  पी. ,बिहार में पल्टा.
इलाके में  योगी के,    भगवा  है    हारा,
मिला 'फूलपुर' मे , न जनता का सहारा.
           बिहार में लालू ने ताकत   दिखाई,
           कि सत्ता का चेहरा, हुआ है हवाई.
बहिन जी भी खुश हैं, भइया भी खुश हैं,
जमानत गँवा कर ,  गाँधी   भी  खुश  हैं.
           जनाधार खो  कर , वामी   भी खुश हैं,
           ये बसपा, सपा के ,सिपाही भी खुश हैं.
सत्ता की भँवों पर , खिचीं हैं लकीरें,
उन्नीस में मुद्दे , अब क्या- क्या उकेंरें.
           अहं  को पड़ा है, अब   तगड़ा तमाचा,
           जनतंत्र में जनता की होती यही भाषा."

धार्मिक स्थलों पर लाउडस्पीकर पर प्रतिबंध

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        उ.प्र.में योगी सरकार के धार्मिक स्थलों पर लाउडस्पीकर पर प्रतिबंध के आदेश को लेकर राजनीति गर्मा गयी है.
        इस संबंध में धवनि प्रदूषण रोकने का हाईकोर्ट का पहले से ही निर्देश है . पिछली सपा सरकार ने भी कुछ ऐसा ही आदेश जारी किया था.
        प्रश्न यह उठता है कि सरकारें कितनी ईमानदारी से ध्वनि प्रदूषण रोकना चाहती हैं.
        हमारे देश में ध्वनि प्रदूषण फैलाने में धार्मिक स्थल व धार्मिक कार्यक्रम  एक बड़ी सीमा तक उत्तरदायी हैं. धार्मिक आयोजन जहॉ मन की शांति के लिये किये जाने चाहिये,वहॉ इनमें लाउडस्पीकर का प्रयोग आस पास के लोगों की नींद हराम करने का कारण बन जाता है. लोग कह नहीं पाते , पर मन ही मन आयोजक को गालियॉ व बददुआयें देते हैं.
        सारी रात चलने वाले  आयोजन बुजुर्गों, बीमारों व पढ़ने वाले बच्चों के लिये सिर दर्द साबित होते हैं. दुर्गा पूजा, गणपति पूजा,यज्य तथा उर्स ,मुहर्रम आदि पर की जाने वाली तकरीरें  आदि अवसरों पर तो हद ही हो जाती है.
       अत: प्रथम दृष्टया यह निर्णय स्वागत योग्य है यदि इसे निष्प छ रूप से लागू किया जाये.
पर आदेश यह है कि बिना इजाजत लाउडस्पीकर का प्रयोग नहीं किया जा सकता.इसी में गड़बड़ी होती है.  इजाजत देने के स्पष्ट मानक तय होने चाहिये. जो अधिकारी गलत मानकों का उल्लंघन कर किसी के रुतबे या प्रभाव में आकर इजाजत दे ,उस पर कठोर कार्यवाही होनी चाहिये.
        आने वाला समय अगले लोकसभा चुनाव की तैयारी का समय है.सरकारें किस तरह काम करतीं हैं ,यह देखना उत्सुकतापूर्ण होग

बस्ती बड़ी अजीब यहाँ की

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        जैसी आशा की जा रही थी, आज श्री लालू यादव को देवधर राजकोषागार मामले में सी सजा का ऐलान हो गया. कोर्ट ने साड़े तीन साल की सजा व पॉच लाख जुर्माने की सजा सुना दी.
         राजद को भी ऐसा पूर्वानुमान था ही,अत: ऐसा माहौल बनाया गया कि जैसे लालू जी शहीद होने जा रहे हैं और सिस्टम के द्वारा उन्हें पिछड़े वर्ग का  होने की सजा दी जा रही है. लालू ने भी समर्थकों से गरीबों के लिये हमेशा संघर्ष करते रहने की भावुक अपील की.
           हमारे देश में राजनीति कहॉ जा रही है? दोषी शर्मिंदा होने की जगह सीनाजोरी दिखा रहे हैं.यानी वे फिर आये तो पुन: इसी रास्ते पर चलेंगें. हमारे यहॉ समर्थक तो व्यक्ति पूजा में अंधे होते हैं,चाहे वे किसी दल के हों. 
          आज के दृश्यों को देख कर मुझे सुकवि विनोद निगम की कविता की पंक्तियाँ याद आ गयीं-
      " बस्ती बड़ी अजीब यहॉ की,
           न्यारी है तहज़ीब यहाँ  की,
              जिनके सारे काम गलत हैं,
                 सुबह गलत है ,शाम गलत है,
                     उनको लोग नमन  करते  हैं."